Wednesday, May 12, 2010

अगर मिलता तो लेते नहीं?

अगर मिलती हमें रिश्वत, तो क्या हम लेते नहीं?
अगर इतना ईमान होता, तो रिश्वत  देते नहीं.
पुलिस वालो को आसानी से मिल जाता है.इसलिए वे ले लेते है.
हम देश की फिकर करने वाले, थोडा गलत काम करते है, इसलिए दे देते है.
वाह भ्र्स्ठाचार की दुहाई देने वाले हम लोग.
जो  भ्र्ठाचार के दैत्य को लगाते है खुद भोग.
और बड़ी बड़ी बातें करते है.
आवाज उठाने में पीछे दुबकते है.
अगर होते इतने बड़े ईमानदार तो इस कदर इस पाप को सहते नहीं
अगर मिलती हमें रिश्वत, तो क्या हम सही में लेते नहीं?

7 comments:

राजीव कुमार कुलश्रेष्ठ said...

एक बेहतरीन रचना
काबिले तारीफ़ शव्द संयोजन
बेहतरीन अनूठी कल्पना भावाव्यक्ति
सुन्दर भावाव्यक्ति .साधुवाद
satguru-satykikhoj.blogspot.com

राजीव कुमार कुलश्रेष्ठ said...

ब्लाग पर आना सार्थक हुआ
काबिलेतारीफ़ है प्रस्तुति
आपको दिल से बधाई
ये सृजन यूँ ही चलता रहे
साधुवाद...पुनः साधुवाद
satguru-satykikhoj.blogspot.com

राजीव कुमार कुलश्रेष्ठ said...

आप अपने ब्लाग की सेटिंग मे(कमेंट ) शब्द पुष्टिकरण
word veryfication पर नो no पर
टिक लगाकर सेटिंग को सेव कर दें .टिप्प्णी
देने में झन्झट होता है अगर न समझ पायें
तो rajeevkumar230969@yahoo.com
पर मेल कर देना .
satguru-satykikhoj.blogspot.com

anoop joshi said...

dhnayabad sir

vivek said...

Acchi rachna hai.....
rachna se accha tital laga

AGAR MILTA TO LETE NAHI

Aapka picture selection kabile taarif hai, rachna ko lekar picture selection jo aapne kiya hai wo behtarin hai..

LIKHTE RAHO
ACCHA HAI

राम त्यागी said...

वाह वाह ...बिलकुल सच्ची बात बोल दी यार ....

anoop joshi said...

thanks 2 all